विमुक्त जातियों के पीड़ित व्यक्तियों का तथा पुलिस का आपसी संवाद बहुत आवश्यक है – रिटा. डीजीपी श्री शुक्ला

विशेष योगदान देने के लिए थाना प्रभारी निशात पुरा श्री रूपेश दुबे को किया गया सम्मानित !

भोपाल:- विमुक्त जनजातियों के मानव अधिकारों तथा समुदाय पुलिस व्यवस्था विषय पर कार्यशाला का आयोजन गांधी भवन में मुस्कान संस्था द्वारा किया गया ! यह कार्यक्रम मुस्कान संस्था द्वारा आयोजित किया गया था ! जो मानव अधिकार के लिये कार्यरत् एक सामाजिक संस्था हैं और विमुक्त ज़न जातियों के कल्याण की दिशा में कार्य कर रही है तथा पीड़ित व्यक्तियों को मुख्य धारा में लाने के लिए तथा उनके बालक बालिकाओं को शिक्षित करने के लिए विशेष प्रयास कर रही है।


संस्था द्वारा आयोजित कार्यशाला मे ऐसे 8 जिलों के पुलिस अधिकारी सम्मिलित हुए जहां पर इन जनजातियों की संख्या अधिक है। पुलिस तथा ज़न जातियों सदस्यों का आपसी संवाद भी हुआ तथा आगे की कार्य योजना क्या होना चाहिए इस पर भी चर्चा हुई। कार्यशाला में औपनिवेशिक काल से इस प्रकार कुछ ज़न जातियों को प्रताड़ित और शोषित करने की जो परंपरायें स्थापित हुई थी उसके बारे में मुस्कान संस्था की ओर से एक बहुत ही सुंदर नाटक का मंचन किया गया, एक प्रदर्शनी भी लगाई गई। मानवाधिकार और विमुक्त जनजातियों के कल्याण के लिये थाना निशातपुरा क्षेत्र में बहुत अच्छा कार्य करने के लिए और विमुक्त जातियों को शिक्षित करने उनकी पंचायतों के साथ संवाद करने और कानून संबंधी व्यवहार हेतु जन जागरुकता लाने में पुलिस कार्य कर रही है और इससे उस क्षेत्र में अपराधों में भी कमी आई है तथा जनजातियों का विस्वास पुलिस के प्रति बढ़ा है तथा सामुदायिक पुलिस कार्यप्रणाली से पुलिस का एक बेहतर चेहरा सामने आया है।

कार्यशाला के समापन समारोह में रिटायर्ड डीजीपी श्री ऋषि शुक्ला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पुलिस के प्रशिक्षण से एवं उन्मुख व्यवहारों के लिए पुलिस लगातार प्रयत्नशील है और इसके लिए विमुक्त जातियों एवं उनके मानव अधिकारों एवं उन्हें मुख्य धारा में लाने के लिए एक सहयोगी पुलिस व्यवस्था कायम करने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस लगातार कार्यरत हैं। श्री शुक्ला ने पीड़ित व्यक्तियों की बातेँ भी सुनी और य़ह भी बताया कि किस तरह से पुलिस इस दिशा में प्रभावी कार्य कर रही है तथा और क्या-क्या करने की अपेक्षा हैं। परन्तु पुलिस का तथा पीड़ित समुदायों का आपस में संवाद होना बहुत आवश्यक है।

इस क्षेत्र मे विशेष योगदान देने के लिये आगर मालवा जिले की एडिशनल एसपी सुश्री निशा रेड्डी को सम्मानित किया गया। उनके द्वारा अपराध मुक्त जीवन जीने के लिए इन प्रभावित समुदायों को प्रेरणा देने में एक विशेष योगदान दिया गया और उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने देवास राजगढ आगर मालवा जिले में विशेष प्रयास करके इन समुदायों की पंचायतों से सामुदायिक पुलिस संवाद स्थापित कर उन्हें कानून की जानकारी प्रदान करने तथा एक बेहतर जीवन अपनाने हेतु विशेष रूप से प्रेरित भी किया है।


इसी अनुक्रम में विशेष योगदान देने के लिए थाना प्रभारी निशात पुरा श्री रूपेश दुबे को सम्मानित किया गया, जिन्होंने इस दिशा मे श्रेष्ठ कार्य करने के लिए तथा इन पीड़ित व्यक्तियों को समाज की मुख्य धारा में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही बैतूल जिले की बैसदेही थाना प्रभारी श्रीमती अंजना धुर्वे द्वारा इस दिशा मे श्रेष्ठ कार्य करने के लिए तथा इन पीड़ित व्यक्तियों को समाज की मुख्य धारा में लाने में, अपराध मुक्त जीवन जीने के लिए प्रेरित करने में और नई युवा पीढ़ी को बेहतर शिक्षा एवं रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करने में इन्होंने बहुत बड़ा योगदान दिया है, इसलिए उन्हें भी सम्मानित किया गया।
मानव अधिकारों से जुड़ी उक्त कार्यशाला में डीआईजी सामुदायिक पुलिसिंग डॉ0 विनीत कपूर तथा दिल्ली से मानव अधिकार विशेषज्ञ श्री नायक, सुश्री देविका तथा नेशनल लॉ युनिवर्सिटी भोपाल के प्रोफेसर यू पी सिंह भी उपस्थित रहे साथ ही 8 जिलों के प्रतिनिधि भी उक्त कार्यशाला में उपस्थित रहे। मुस्कान संस्था की संयोजिका शिवानी तथा सीमा देशमुख द्वारा सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया।

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