मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने भाग्योदय तीर्थ एवं राहतगढ़ पहुंचकर आचार्य विद्यासागर महाराज जी को अर्पित की विनयांजलि

आचार्य श्री विद्यासागर ने भगवान को पाने का नहीं, भगवान बनने का मार्ग बताया हैःगोविंद सिंह राजपूत

भोपाल। आचार्यश्री विद्यासागर महाराज का समाधिमरण के पश्चात विशिष्ट क्षणों का स्मरण करते हुए, उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व के प्रति समर्पण भाव प्रकट करने के लिए जिले भर में विनयांजलि सभाओं का आयोजन किया गया। सागर के भाग्योदय तीर्थ तथा सुरखी विधानसभा क्षेत्र के राहतगढ़ में आयोजित आचार्य विद्यासागर जी महाराज की विनयांजलि सभा में शामिल हुए खाद्य,नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत। श्री राजपूत ने गुरुवर आचार्य विद्यासागर महाराज को विनयांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज केवल जैन समाज के संत नहीं थे बल्कि उन्हें हर धर्म, समाज के लोग भगवान की तरह पूजते थे और उनके विचारों को आत्मसात करते थे आचार्य श्री ने शरीर छोड़ा है, संसार नहीं, उनकी शिक्षा, विचार, सिद्धांत, ज्ञान एवं त्याग हमेशा हम सब के हृदय में रहेगा। आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने भगवान को पाने का नहीं, भगवान बनने का मार्ग बताया है उन्होंने हिंदी भाषा को लेकर हमेशा अपने विचार रखें, उनके विचारों और बात का सम्मान करते हुए भाजपा सरकार ने प्रदेश में इंजीनियरिंग तथा मेडिकल की पढ़ाई भी हिंदी में शुरू की।

श्री राजपूत ने कहा कि गुरुवार के व्यक्तित्व का बखान करना यानि सूरज को दीपक दिखाने के समान है। हम सब उनके बताये मार्गों पर चलकर उन्हें सच्ची विनयांजलि अर्पित करें। गुरूवर ने हमेशा गौ संरक्षण, विद्या दान, कैदियों को स्वावलंबन, गौ मांस पर पाबंदी, जैन तीर्थ संरक्षण इंडिया ने भारत कहो,जैंसे अनेक राष्ट्र हित तथा मानव कल्याण के विचारों को रखा है। श्री राजपूत ने कहा कि मैंने कलयुग में भगवान को नहीं देखा है, भगवान के रूप में साक्षात् आचार्य विद्यासागर जी महाराज को देखा है, जिनके तपस्या, त्याग और मानव कल्याण की भावना ने करोड़ों लोगों का कल्याण किया है। राहतगढ़ में क्षेत्रवासियों की मांग पर श्री राजपूत ने राहतगढ़ में बस स्टैंड का नाम आचार्य श्री विद्यासागर जी के नाम पर रखे जाने की बात कहीं। साथ ही श्री राजपूत ने आश्वासन दिया कि जैन समाज द्वारा आचार्य श्री को भारत रत्न दिये जाने की मांग को वह मुख्यमंत्री तथा केंद्र तक रखेंगें। आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज की विनयांजलि सभा में जैन समाज ही नहीं सभी जाति, धर्म, समुदाय के लोग शामिल हुए जिन्होंने आचार्यश्री के चरणों में भावभीनी विनयांजलि अर्पित करते हुए उन्हें याद किया।

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