अधिकारी-कर्मचारी के यहां लोकायुक्त ने छापा नहीं मारा! क्यों? क्या ये राजनीतिक मजबूरी है? या फिर, कोई छुपा हुआ एजेंडा? – जीतू पटवारी

भोपाल – प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी ने अपने आक्रामक अंदाज को बरकरार रख्ते हूऐ सरकार से सवाल किया कि मध्य प्रदेश में सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के यहां छापा पड़ता है! करोड़ों की बेनामी प्रॉपर्टी मिलती है! सक्रिय सरकार, लोकप्रिय लोकायुक्त का माहौल बनता है! श्री जीतू पटवारी ने कहा कि लेकिन, ऐसा क्या है कि फिर भी भ्रष्ट चेहरों का कुछ नहीं बिगड़ता! सजा तो दूर, मामले कोर्ट तक ही नहीं पहुंच पाते! क्योंकि, लोकायुक्त जांच आराम से चलती रहती है! इस मामले में आगे बोलते हुऐ श्री जीतू पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश में पिछले 05 साल में 76 छापे पड़े! 62 मामलों में अभी तक जांच ही चल रही है! 06 मामलों की जांच पूरी तो हो गई, लेकिन सरकार ने कोर्ट में केस चलाने की मंजूरी नहीं दी! बाकी 08 मामले कोर्ट में हैं!श्री पटवारी ने कहा कि सवाल तो यह भी है कि पिछले 04 महीने में एक भी अधिकारी-कर्मचारी के यहां लोकायुक्त ने छापा नहीं मारा! क्यों? क्या ये राजनीतिक मजबूरी है? या फिर, कोई छुपा हुआ एजेंडा?

सवालोे को आगे बढ़ाते हुऐ श्री जीतू पटवारी ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों का स्पष्ट रूप से मानना है कि लोकायुक्त और लोकायुक्त संगठन पर जितने करोड़ रुपए का बजट खर्च होता है, उतना पैसा भी भ्रष्ट सरकारी अफसरों से वसूल नहीं हो पाता? उन्होने कहा कि अब यदि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए कार्रवाई की बात करें, तो सजा का प्रतिशत भी बहुत कम है! क्या वजह कि एक-दो विभाग ही हमेशा निशाने पर रहते हैं! जबकि, भ्रष्टाचार के ष्संस्कारष् सभी विभागों की शोभा बढ़ा रहे हैं!

श्री पटवारी ने कहा कि पूछा तो यह भी जाना चाहिए कि 2011 में मप्र सरकार द्वारा बनाए राजसात कानून के तहत भ्रष्ट अफसरों की संपत्ति राजसात क्यों नहीं हो पा रही है? लोकायुक्त संगठन में भी विजिलेंस अफसर की व्यवस्था प्रभावी क्यों नहीं है? भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1) (डी) में भ्रष्ट लोकसेवकों के विरुद्ध जांच के बाद कार्रवाई की जाती है! दोष सिद्ध होने के बाद चार से सात साल तक की सजा और जुर्माना का प्रावधान है! इस लिहाज से मध्यप्रदेश की स्टेटस रिपोर्ट क्या है?
उन्होने आगे कहा कि कर्ज लेकर, कर्जदार प्रदेश में सरकार चलाने वाली भाजपा क्या भ्रष्टाचार में भागीदार है? यह एक ऐसा सवाल है जो पिछले 20 सालों से पब्लिक डोमेन में है! वर्ष 2003 के बाद के 04 मुख्यमंत्री भी इस सवाल का निर्णायक जवाब नहीं दे पाए हैं! क्यों?

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ने कहा कि क्या मोहन यादव जी इस दिशा में कोई प्रभावी पहल करेंगे? क्या चाल, चेहरे और चरित्र की चर्चा करने वाले दल की नेतृत्व पंक्ति इस बात का विश्वास दिला पाएगी कि जनता भ्रष्ट व्यवस्था से निजात पा सकती है?

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