महिला आरक्षण पर संसद का विशेष सत्र आज से, सरकार और विपक्ष में तकरार बढ़ी, दक्षिण के राज्यों ने भी परिसीमन के खिलाफ खोला मोर्चा

महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर संसद के विशेष सत्र से पहले ही पक्ष और विपक्ष में टकराव बढ़ गया है। उधर, तमिलनाडु के सीएम स्टालिन और रेवंत रेड्डी ने भी परिसीमन पर तीव्र विरोध जताया है।

नई दिल्ली : महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल से 19 अप्रैल तक तीन दिनों का संसद सत्र बुलाया है। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आरक्षण देने के लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (Women’s Reservation Act, 2023) के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करना और इसे 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले लागू करना है। लेकिन संसद सत्र से पहले ही पक्ष और विपक्ष में टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस ने सरकार के इस कदम की मंशा पर सवाल उठाए जबकि बीजेपी ने कांग्रेस पर अतीत में महिलाओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उधर, दक्षिण के राज्यों ने भी मोर्चा खोल दिया है। रेवंत रेड्डी और स्टालिन खुलकर परिसीमन के विरोध में आ गए हैं। 

लोकतंत्र और अधिक मजबूत एवं जीवंत बनेगा-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने इसे लेकर  देश की महिलाओं के नाम एक खुली चिट्ठी भी लिखी। पीएम मोदी ने कहा कि यदि 2029 में लोकसभा और विभिन्न विधानसभा चुनाव पूरी तरह महिला आरक्षण लागू होने के साथ कराए जाते हैं, तो भारतीय लोकतंत्र और अधिक मजबूत एवं जीवंत बनेगा। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएंगी, तो ‘विकसित भारत’ की यात्रा को और मजबूती मिलेगी।

स्टालिन और रेवंत रेड्डी ने किया विरोध

दक्षिण भारत के दो प्रमुख गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों- तमिलनाडु के एम.के.स्टालिन और तेलंगाना के ए.रेवंत रेड्डी ने परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र पर हमला तेज कर दिया। स्टालिन ने चेतावनी दी कि यदि तमिलनाडु के साथ कोई अन्याय हुआ तो “व्यापक आंदोलन” होगा, जबकि रेड्डी ने इसे “अन्याय” बताया। रेड्डी ने प्रधानमंत्री को खुले पत्र में सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की और कहा कि केवल जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों में वृद्धि करने से देश के संघीय संतुलन पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों के लिए यह ‘अनुपात आधारित मॉडल’ स्वीकार्य नहीं होगा और बिना उनकी चिंताओं को दूर किए आगे बढ़ने पर व्यापक विरोध होगा। उन्होंने आंध्र प्रदेश के एन.चंद्रबाबू नायडू, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन.रंगासामी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन से मिलकर सामूहिक रणनीति बनाने की भी अपील की। वीडियो संदेश में स्टालिन ने कहा कि यदि परिसीमन के जरिये उत्तरी राज्यों की राजनीतिक ताकत असंतुलित तरीके से बढ़ाई गई, तो तमिलनाडु में जोरदार विरोध प्रदर्शन होंगे। 

इस कानून से सीटों की मौजूदा संख्या बढ़ जाएगी

महिला आरक्षण कानून को 2029 के आम चुनाव से पहले लागू करने के लिए परिसीमन करके लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर लगभग 850 तक की जा सकती है। संविधान संशोधन विधेयक के मसौदे के अनुसार, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सीटें बढ़ाई जाएंगी। सरकार द्वारा महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक सांसदों के बीच साझा किए जाने के बाद कांग्रेस ने कहा कि यदि किसी विधेयक की मंशा ‘भ्रामक’ हो, तो उससे संसदीय लोकतंत्र को गंभीर नुकसान हो सकता है। 

एनडीए ने इसे ऐतिहासिक बताया

वहीं, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने प्रधानमंत्री के इस कदम को “ऐतिहासिक” बताते हुए समर्थन दिया। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह पहल महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है और भारतीय लोकतंत्र में “स्वर्णिम अध्याय” जोड़ेगी। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन.चंद्रबाबू नायडू ने भी सभी दलों और सांसदों से महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन का समर्थन करने की अपील की।

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