108 मज़ारें ध्वस्त – राज्य में मुख्यमंत्री का बुलडोज़र चल रहा है:- गुजरात गृह मंत्री

दादा (भूपेंद्र पटेल) का बुलडोजर प्रदेश के कोने-कोने में घूम रहा हैकोई नहीं जानता कि यह (बुलडोजर) कहां जाएगा.’

नई दिल्ली:– भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार ने राज्य में 108 मज़ारों को ध्वस्त कर दिया है. द्वारका से शुरू हुआ अतिक्रमण विरोधी अभियान पोरबंदर, अहमदाबाद, सूरत, पावागढ़, गिर सोमनाथ और जामनगर तक पहुंच गया है. गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने बीते बुधवार (21 फरवरी) को विधानसभा में कहा कि भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार ने राज्य में 108 मजारों को ध्वस्त कर दिया है. गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने राज्य विधानसभा में कहा !
उन्होंने यह भी कहा कि ‘साजिश के हिस्से’ के रूप में सामने आने वाले किसी भी अतिक्रमण के खिलाफ अभियान जारी रहेगा.
गृह और परिवहन विभागों की बजटीय मांगों पर चर्चा के दौरान बोलते हुए संघवी ने (एलिसब्रिज से) भाजपा विधायक अमित शाह के पहले के भाषण का जिक्र किया, जिन्होंने अहमदाबाद के जमालपुर में एक जैन डेरासर (मंदिर) से मूर्तियों के स्थानांतरण के बारे में बात की थी, जब राज्य में कांग्रेस सत्ता में थी.
रिपोर्ट के मुताबिक, संघवी ने कहा, ‘अमित भाई ने जो बात बताई थी उन्होंने कहा था कि जमालपुर में एक डेरासर को हटा दिया गया था. अब दादा (भूपेंद्र पटेल) का बुलडोजर प्रदेश के कोने-कोने में घूम रहा है, ताकि साजिश रचते हुए किसी मंदिर या देवस्थान को हटाया न जा सके. कोई नहीं जानता कि यह (बुलडोजर) कहां जाएगा.’

उन्होंने कहा, ‘कुल मिलाकर (राज्य में) 108 मजारों को ध्वस्त कर दिया गया है और राज्य की संपत्तियों को मुक्त करा दिया गया है ! सोमनाथ के आसपास अतिक्रमण हटा दिया गया है. दादा का ये बुलडोजर 20 फीट चौड़ी सड़क और 80 मीटर चौड़ी सड़क में घुस सकता है.’

संघवी ने आगे कहा कि ‘बुलडोजर’ किसी भी अतिक्रमण को ध्वस्त करने के लिए तैयार है, जो एक साजिश का हिस्सा है.
सरकार ने 74 करोड़ रुपये की लागत से ऐतिहासिक ऊपरकोट किले का जीर्णाेद्धार कराया है. इसका उद्घाटन भूपेंद्र पटेल ने पिछले सितंबर में किया था.
संघवी ने कहा कि द्वारका से शुरू हुआ अतिक्रमण विरोधी अभियान पोरबंदर, अहमदाबाद, सूरत, पावागढ़, गिर सोमनाथ और जामनगर तक पहुंच गया है.
नवरात्रि का जिक्र करते हुए, जब सरकार लोगों को उत्सव की नौ दिन रात को गरबा करने की अनुमति दी थी, मंत्री ने कहा, ‘नवरात्रि को पूरी रात (मनाने की) अनुमति दी गई ताकि गुजरात के लोग देवी की पूजा कर सकें और रात भर रास खेल सकें. सुप्रीम कोर्ट और (गुजरात) हाईकोर्ट और उसके डर को ध्यान में रखते हुए, हमने निश्चित रूप से (संगीत की) ध्वनि कम कर दी थी.’
नवरात्रि का जिक्र करते हुए, जब सरकार लोगों को उत्सव की नौ रातों को गरबा करने की अनुमति देती है, मंत्री ने कहा, ‘नवरात्रि को पूरी रात (मनाने की) अनुमति दी गई ताकि गुजरात के लोग देवी की पूजा कर सकें और रात भर रास खेल सकें. सुप्रीम कोर्ट और (गुजरात) हाईकोर्ट और उसके डर को ध्यान में रखते हुए हमने निश्चित रूप से (संगीत की) ध्वनि कम कर दी थी.’
मंत्री ने कहा, ‘मैंने (तब) एक बयान दिया था कि अगर मेरे राज्य के लोग गरबा नहीं कर सकते हैं तो क्या वे पाकिस्तान में ऐसा करेंगे? इस बयान के अगले ही दिन एक पक्ष के लोगों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी. राज्य के लोग देर रात तक गरबा करें तो उन्हें दिक्कत है. क्या लोग देर तक गरबा नहीं कर सकते? हमें उस स्थिति का सामना करना पड़ा.’
वह अहमदाबाद के एक निवासी की शिकायत के साथ हाईकोर्ट में शिकायत करने का जिक्र कर रहे थे, जिसमें संघवी द्वारा पुलिस को मौखिक रूप से आधी रात की समयसीमा के बाद गरबा आयोजित करने की अनुमति देने का निर्देश देने की रिपोर्ट पर आपत्ति जताई गई थी.

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